गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

अमेरीका-जापान जैसे देशों में राष्ट्र का उत्थान चाहने वाले राष्ट्रवादी लीडर्स जाती/धर्म की राजनीति नहीं करते।
राजनेताओं और मतदाताओं के बीच दिल का रिश्ता नहीं,
आजकल भावनात्मक, अस्थायी रुप से कृत्रिम बनावटी जुड़ाव होता है ...
इसके लिए जाती/धर्म का शोर्टेस्ट रास्ता अपनाया जाता है,
क्योंकि मतदाताओं को दिल से जोड़ने के लिए उनके बीच रहना पड़ता है,
मतदाताओं की समस्या तकलीफ हटो या ना हटो, उनके दुख दर्द में साथ रहना,
काम पड़ने पर साथ देना पड़ता है।
इधर जाती धर्म के शोर्टकट रास्ते में करना क्या,
किसी एक पक्ष के लोगों का सच्चा झूठा समर्थन करते हुए, दूसरे पक्ष की...
सच्ची झूठी बातें कर उन्हे भड़काओ,
उन्हें गालियाँ निकालो तालियाँ बजवाओ, लो हो गए वो तालियाँ बजाते वोट पक्के ...
राजनैतिक दलों से मतदाता यानि नागरिक दिल से जुड़े ...
उसके लिए, उन्हें पक्ष विपक्ष में रहते हुए, क्षेत्र में, फील्ड में काम करना पड़ता है,
उन्हें जन कल्याण की एवं राष्ट्रीय विकास की छोटी बड़ी योजनाओं को,
दूरर्दशी तरीके से नागरिक हितों की ओर मोड़ने के लिए ईमान से मेहनत करनी पड़ती है, जो यह सब उन सत्तालोलुप नेताओं में इतनी सब्र कहाँ है!

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