अमर सिंह जोधा की कलम से
इन्सानों की दुनिया अब धीरे धीरे हैवान बनती जा रही है क्योकि इस युग मे न कोई राम व कृष्ण है और न ही कोई कर्ण और अर्जून है
क्योकि सब मतलबी बन गये पता नही आजकल लोग कहते है की मरते वक्त पैसे साथ तो नही चल सकते लेकिन काम जरुर आते है
जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाय,
शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर के जिया जाये
जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ऐ जिंदगी
तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ही लिया जाये
BnNA Sarkar
इन्सानों की दुनिया अब धीरे धीरे हैवान बनती जा रही है क्योकि इस युग मे न कोई राम व कृष्ण है और न ही कोई कर्ण और अर्जून है
क्योकि सब मतलबी बन गये पता नही आजकल लोग कहते है की मरते वक्त पैसे साथ तो नही चल सकते लेकिन काम जरुर आते है
जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाय,
शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर के जिया जाये
जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ऐ जिंदगी
तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ही लिया जाये
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